नवरात्रि 2020: नवरात्रि पर अखंड ज्योति क्यों जलती है? नियम क्या हैं?

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    नवरात्रि 2020: नवरात्रि पर अखंड ज्योति क्यों जलती है?  नियम क्या हैं?

    नवरात्रि के पहले दिन जहां कलश स्‍थापना कर देवी का आह्वन किया जाता है. वहीं, इसी दिन अखंड ज्‍योति जलाने का विधान भी है.

    Navratri 2020: देशभऱ में नवरात्रि की धूम है, हर तरफ लोग मां दुर्गा के स्वागत की तैयारियों में लगे हैं. नवरात्र या नवरात्रि (Navratri) कल से शुरू हो रही है, पौराणिक मान्‍यताओं के अनुसार नौ दिनों तक चलने वाला यह महाउत्‍सव मां दुर्गा (Maa Durga) की कृपा पाने का सबसे सुनहरा समय होता है. इस दौरान भक्‍त मां को प्रसन्‍न करने के लिए नौ दिनों तक उपवास रखते हैं. नवरात्रि के पहले दिन जहां कलश स्‍थापना (Kalash Sthapna) कर देवी का आह्वन किया जाता है. वहीं, इसी दिन अखंड ज्‍योति ( Akhand Jyoti) जलाने का विधान भी है. अखंड ज्‍योति जलाने के पीछे वजह यह है कि जिस तरह छोटा-सा दीपक विपरीत परिस्थितियों में भी अपनी लौ से अंधेरे को दूर भगा देता है उसी तरह हम भी माता की आस्‍था के सहारे अपने जीवन के अंधकार को मिटा सकते हैं. कहते हैं कि दीपक की ज्‍योत के सामने जप किया जाए तो साधक को हजार गुना फल मिलता है.

    दीपक के बिना हर पूजा अधूरी है। दीपक ज्ञान, प्रकाश, भक्ति और भक्ति का प्रतीक है। नवरात्रि के नौ दिनों में अखंड ज्योति जलाई जाती है। इसका मतलब है कि इन नौ दिनों में जलाया जाने वाला दीपक दिन-रात जलता रहता है। नवरात्रि के पहले दिन व्रत का संकल्प लेते हुए कलश की स्थापना की जाती है और फिर अखंड दीप जलाया जाता है। ऐसा माना जाता है कि व्रत के अंत तक अखंड दीपक को नहीं बुझाना चाहिए।

    अखंड प्रकाश से संबंधित नियम क्या हैं

    अगर आप भी नवरात्रि में अखंड ज्योति जलाना चाहते हैं, तो इन नियमों का पालन करें:

    – दीपक जलाने के लिए, सामान्य से बड़ा दीपक लें। यह मिट्टी का दीपक भी हो सकता है। वैसे, पीतल का दीपक शुद्ध माना जाता है।

    – अखंड ज्योति का दीपक कभी भी खाली जमीन पर नहीं रखना चाहिए।

    – इस दीपक को लकड़ी की प्लेट या चौकी पर रखें।

    – दरवाजे या चौकी पर दीपक रखने से पहले उसमें गुलाल या रंगे हुए चावल से अष्टदल बनाएं।

    – अखंड ज्योति की बाती रक्षा सूत्र से बनाई जाती है। इसके लिए, एक चौथाई भाग का रक्षा हाथ लें और इसे बाती की तरह बनाएं और फिर इसे दीपक के बीच में रखें।

    अब दीपक में घी डालें। यदि घी उपलब्ध नहीं है तो सरसों या तिल के तेल का भी उपयोग किया जा सकता है।

    मान्यता के अनुसार, अगर घी का दीपक जलाया जाता है, तो उसे देवी के दाईं ओर रखा जाना चाहिए।

    – अगर दीपक तेल का है, तो उसे देवी मां के बाईं ओर रखें।

    – दीपक जलाने से पहले भगवान गणेश, मां दुर्गा और भगवान शिव का ध्यान करें।

    – अगर आप किसी विशेष मनोकामना को पूरा करने के लिए इन अखंड ज्योति को जला रहे हैं, तो पहले हाथ जोड़कर मन में उस इच्छा को दोहराएं।

    – अब “ॐ जयंती मंगला काली भद्रकाली कपालिनी दुर्गा क्षमा शिवा धात्री स्वाहा स्वधा नमोऽस्तु‍ते।।” मंत्र का उच्चारण करते हुए दीपक जलाएं

    अब अष्टदल पर कुछ लाल फूल भी रखें।

    ध्यान रखें कि अखंड ज्योति व्रत को अंत तक नहीं बुझाना चाहिए। इसलिए बीच-बीच में घी या तेल मिलाते रहें और बाती को भी ठीक करते रहें।

     

     

     

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