जानिए, बाथरूम में क्यों आते हैं सबसे ज्‍यादा Heart Attack, अधिकतर लोग करते हैं ये गलती

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    जानिए, बाथरूम में क्यों आते हैं सबसे ज्‍यादा Heart Attack, अधिकतर लोग करते हैं ये गलती

    नई दिल्ली: हार्ट अटैक या कार्डियक अरेस्ट आज के दौर में लोगों के लिए सबसे गंभीर समस्या बन गई है. हार्ट अटैक (Heart Attack Occur In Washroom) अचानक ही होता है. लेकिन आपको बात दें कि इसकी बहुत सी वजह हैं. जैसे, गलत लाइफ स्टाइल और अनहेल्दी खान पान जैसी चीजें शामिल है. वैसे तो हार्ट अटैक आने का कोई निर्धारित समय या मौसम नहीं नहीं होता. लेकिन सबसे ज्यादा हार्ट अटैक या कार्डियक अरेस्ट सुबह में बाथरूम के अंदर आते हैं.

    क्या होता है हार्ट अटैक और कार्डियक अरेस्ट

    गौरतलब है कि हार्ट अटैक और कार्डियक अरेस्ट (Heart Attack Occur In Washroom) का सीधा संबंध हमारे खून से होता है. खून के जरिए हमारे शरीर में ऑक्सीजन और जरूरी पोषक तत्व पहुंचते हैं. लेकिन जब हमारे हृदय तक ऑक्सीजन पहुंचाने वाली, धमनियों में प्लाक जमने की वजह से रुकावट पैदा होने लगती है, तो इससे दिल की धड़कन की रफ्तार असंतुलित हो जाती है. ऐसी स्थिति में हार्ट अटैक या कार्डियक अरेस्ट आ जाता है.

    बाथरूम में हार्ट अटैक आने के कारण

    अब आपके जेहन में ये सवाल जरूर या रहा होगा कि आखिर ऐसा क्यों होता है. दरअसल बाथरूम में हार्ट अटैक (Heart Attack Symptom) आने के पीछे बहुत से कारण होते हैं. आपको इन वजहों के बारे में जानकारी जरूर होनी चाहिए ताकि आप खुद को और अपने परिवार को इससे सुरक्षित रख सकेंतो आज हम आपको बता रहे हैं कि सुबह के समय बाथरूम में हार्ट अटैक क्यों आते हैं? लेकिन इससे पहले आपका ये जान लेना जरूरी है कि आखिर हार्ट अटैक या कार्डियक अरेस्ट क्या होता है?

    ​बाथरूम में हार्ट अटैक आने का पहला कारण

    जब हम सुबह के समय टॉयलेट जाते हैं तो पेट को पूरी तरह साफ करने के लिए प्रेशर लगाते हैं. ध्यान दें, इंडियन टॉयलेट का इस्तेमाल करते वक्त लोग अधिक प्रेशर लगाते दिखाई देते हैं. इस प्रेशर से हमारे दिल की धमनियों पर अधिक दबाव पड़ता है. इससे हार्ट अटैक या कार्डियक अरेस्ट आने के चांस ज्यादा होते हैं.

    ​बाथरूम में अटैक आने का दूसरा कारण

    बाथरूम का तापमान हमारे घर के अन्य कमरों के मुकाबले अधिक ठंडा रहता है. क्योंकि यहां पानी का फ्लो बार- बार होता रहता है. ऐसी स्थिति में शरीर के तापमान को संतुलित करने और खून सर्कुलेशन बनाए रखने के लिए अधिक मेहनत की जरूरत पड़ती है. दिल का दौरा पड़ने का ये एक बड़ा कारण होता है.

    ​बाथरूम में अटैक आने का तीसरा कारण

    सुबह के समय हमारा ब्लड प्रेशर (Heart Attack Ke Reason) थोड़ा हाई होता है. ऐसे में हम जब नहाने के लिए अधिक ठंडा या गर्म पानी सीधा सिर पर डाल देते हैं, तो इससे ब्लड प्रेशर और बढ़ जाता है. इससे हार्ट अटैक आने का खतरा बढ़ जाता है. इसलिए बाथरूम में सबसे ज्यादा अटैक आता है.

    ​​हार्ट अटैक से बचाव के तरीके

    ​​हार्ट अटैक (Heart Attack Ke Bachav) के जोखिम के बाद अब हमारा ये जान लेना जरूरी है कि इससे कैसे बचा जा सकता है. अगर आप इंडियन टॉयलेट का इस्तेमाल करते हैं, तो ज्यादा देर तक एक ही पोजिशन में ना बैठें. इससे आप हार्ट अटैक या कार्डियक अरेस्ट के जोखिम से बच सकते हैं.
    नहाते समय पानी के तापमान के हिसाब से सबसे पहले पैरों के तलवों को भिगोएं. इसके बाद हल्का पानी सिर पर डालें. इससे आपके शरीर और बाथरूम्का तापमान दोनों संतुलित रहेगा.
    टॉयलेट में पेट साफ करने के लिए ना तो अधिक जोर लगाएं और ना ही जल्दबाजी दिखाएं. टॉयलेट में थोड़ा समय लें.
    नहाते समय अगर आप बाथ टब या पानी का इस्तेमाल करते हैं इसका असर भी आपकी धमनियों पर पड़ता है. इसलिए अधिक समय तक बाथ टब में ना बैठें.

    हार्ट अटैक के लक्षण

    ​हार्ट अटैक (Heart Attack Symptom) अचानक होने वाली समस्या है. इसलिए ये जरूरी है कि आप इसके लक्षण को जान लें. ताकि किसी में कभी ऐसे लक्षण दिखें तो आप जान सकें कि ये ​हार्ट अटैक है.
    सीने में तेज दर्द होना
    सांस लेने में परेशानी आना
    कमजोरी महसूस करना
    डाइबिटीज के पेशेंट को कई बार बिना कोई लक्षण दिखे भी हार्ट अटैक आ जाता है. इसे साइलेंट हार्ट अटैक कहा जाता है.
    तनाव और घबराहट होना भी हार्ट अटैक का लक्षण है.
    चक्कर या उल्टी आना भी एक लक्षण है.
    ​​हार्ट अटैक आने पर क्या करें.

    ​हार्ट अटैक आने पर तुरंत क्या करें?

    अगर किसी में ​हार्ट अटैक (Heart Attack Ke Upchar) के लक्षण नजर आते हैं तो तुरंत सावधान हो जाएं और ये उपाय करें.
    किसी व्यक्ति को हार्ट अटैक आए तो आप उसे सबसे पहले जमीन पर लेटा दें.
    लेटने के बाद अगर उसने अधिक टाइट कपड़े पहने हैं तो उन्हे खोल दें.
    लेटाते समय व्यक्ति का सिर थोड़ा ऊपर की ओर हो इस बात का खास ध्यान रखें.
    एंबुलेंस के लिए तुरंत फोन करें.
    हाथ पैरों को रगड़ते रहें.

     

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