Coronavirus: क्या है वायरस का डबल म्यूटेंट वेरिएन्ट और ये आपके लिए कितना खतरनाक हो सकता है? जानें

स्वास्थ्य मंत्रालय के मुताबिक, कोरोना वायरस की दूसरी लहर में कई हकीकत हैं जो अधिकारियों के लिए चिंता की वजह बन गई हैं. उनमें से सबसे महत्वपूर्ण भारत में पाए गए कोरोना वायरस का डबल म्यूटेंट वेरिएन्ट है.

कोरोना वायरस महामारी भारत और दुनिया भर के लिए अप्रत्याशित संकट है. यहां तक कि वैक्सीन के आविष्कार से भी हमारी लड़ाई खत्म नहीं हुई है. वायरस के नए म्यूटेशन और वेरिएन्ट्स हमारी समस्या और चिंता में इजाफा कर रहे हैं. अब, वायरस के केंट वेरिएन्ट और दक्षिण अफ्रीका वेरिएन्ट की खोज के बाद अन्य म्यूटेंट स्ट्रेन खतरे की घंटी बजा रहा है. केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने बुधवार को जानकारी दी है कि भारत में कोरोना वायरस के एक नए ‘डबल म्यूटेंट’ वेरिएंट का पता चला है.

मंत्रालय ने बताया कि कई ‘वेरिएन्ट्स ऑफ कंसर्न्स’ देश के 18 राज्यों में पाए गए हैं. इसका मतलब हुआ कि कोरोना वायरस के विभिन्न प्रकार का अलग-अलग जगहों पर पता चला है जो स्वास्थ्य पर हानिकारक प्रभाव डाल सकते हैं. गौरतलब है कि नई चेतावनी ऐसे समय आई है जब भारत में संक्रमण के मामले एक बार फिर तेजी से बढ़ रहे हैं और कई राज्य नए सिरे से लॉकडाउन लागू करने के मुहाने पर खड़े हैं.

स्वास्थ्य मंत्रालय ने दिया बयान

अनुमान लगाया जा रहा है कि वही डबल म्यूटेंट वेरिएन्ट उछाल का जिम्मेदार हो सकता है. कई विशेषज्ञों को ये भी डर है कि नए म्यूटेंट स्ट्रेन का चिंताजनक फैलाव भी भारत के संक्रमण की दूसरी लहर को पहली लहर के मुकाबले ज्यादा खराब कर सकता है. हालांकि, स्वास्थ्य मंत्रालय ने साफ कर दिया है कि डबल म्यूटेंट वेरिएंट के कारण देश में संक्रमण के मामले नहीं बढ़ रहे हैं.

डबल म्यूटेंट की पहचान महाराष्ट्र में हुई पहली बार

डबल म्यूटेंट वेरिएन्ट उस वक्त उजागर होता है जब वायरस स्ट्रेन के दो म्यूटेशन तीसरे को बनाने के लिए एक साथ आ जाते हैं. डबल म्यूटेशन की पहचान पहली बार महाराष्ट्र में की गई थी. पॉजिटिव आनेवाले मामलों की जीनोम सिक्वेंसिंग और सैंपल टेस्टिंग से पुष्टि करने में सफलता मिली है कि दिसंबर से E484Q और L452R म्यूटेशन में तेज उछाल दर्ज किया गया है. हालांकि, E484Q म्यूटेशन घरेलू है जबकि L452R म्यूटेशन का संबंध अमेरिका से जुड़ता है.

कितना खतरनाक है डबल म्यूटेंट वेरिएन्ट?

डबल म्यूटेंट वेरिएन्ट खतरनाक है क्योंकि ये न सिर्फ शरीर के इम्यून सिस्टम से बच सकता है बल्कि शरीर में तेजी से संक्रमण को फैला भी सकता है. ये वेरिएन्ट इस मायने में भी खतरनाक हो सकता है क्योंकि वायरस की एक ही शक्ल में दो तब्दीली हुई है. कहा जाता है कि डबल म्यूटेंट वेरिएन्ट ज्यादा संक्रामक है और सार्स-कोव-2 की तुलना में कोरोना वायरस ज्यादा फैलनेवाला है. महामारी रोग विशेषज्ञों का मानना है कि डबल म्यूटेंट वेरिएन्ट न सिर्फ संक्रमण की तादाद में बढ़ोतरी का कारण बन रहा है बल्कि उसमें इम्यून सिस्टम को पार करने की भी क्षमता है. संक्रमण के मामलों में वर्तमान उछाल भी ट्रांसमिशन में वृद्धि की वजह बन रहा है.

क्या है वेरिएन्ट?

विभिन्न प्रकार के वायरस के जीनोमिक वेरिएंट में बदलाव होना आम बात है. विशेषज्ञों का कहना है कि वेरिएंट का एक साथ म्यूटेशन हो सकता है और आपस में मिल सकते हैं. ब्रिटेन, ब्राजील और दक्षिण अफ्रीका वेरिएंट में करीब 8-10 म्यूटेशन देखे जा चुके हैं. किसी भी वायरस में निरंतर बदलाव होता रहता है और ये प्राकृतिक प्रक्रिया है. वायरस अपने अंदरुनी ढांचे को बदलते रहता रहता है. जब म्यूटेशन का इंसानी शरीर पर प्रभाव होता है, तब ये वेरिएन्ट कहलाता है. कोरोना वायरस का ये नया वेरिएन्ट भी ब्रिटेन, सिंगापुर, डेनमार्क, जापान और ऑस्ट्रेलिया समेत दुनिया के 16 अन्य देशों में भी पाया गया है.

 

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