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कोरोना के लक्षण दिखने पर कौन सा टेस्ट कराना सही है और क्यों? जानिए ऐसे ही सवालों के जवाब

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कोरोना के लक्षण दिखने पर कौन सा टेस्ट कराना सही है और क्यों? जानिए ऐसे ही सवालों के जवाब

कोरोना के लक्षण दिखने पर कौन सा टेस्ट कराना सही है और क्यों? जानिए ऐसे ही सवालों के जवाब

भोपालः

कोरोना की दूसरी लहर से भारत समेत कई देशों में हालात बेहद खराब हो चले हैं. इस दौरान हम अखबारों पर या टीवी पर न्यूज चैनल्स पर कुछ टर्म के बारे में सुनते हैं लेकिन असल में हमे पता नहीं है कि वो क्या हैं. इसलिए हमने यहां कोरोना टेस्टिंग से जुड़े सवालों के जवाब देने की कोशिश की है कि कोरोना के टेस्ट कौन-कौन से होते हैं और कौन सा तरीका इनमें कारगर है. तो आइए जानते हैं.

ये टेस्ट करवा सकते हैं

कोरोना के लक्षण दिखने पर कोई भी व्यक्ति नजदीकी सरकारी या निजी अस्पताल में जाकर अपना टेस्ट करा सकता है. सरकारी अस्पताल में यह निशुल्क है लेकिन निजी अस्पताल में आपको टेस्ट के हिसाब से भुगतान करना होगा. कोरोना की जांच के लिए मुख्य तौर पर तीन टेस्ट होते हैं.

एंटीबॉडी टेस्ट किट-

इस टेस्ट किट की मदद से इंसान के शरीर में कोरोना के खिलाफ मौजूद एंटीबॉडी का पता लगाया जाता है. अगर किसी के शरीर में कोरोना वायरस के खिलाफ एंटीबॉडी  मौजूद होगी तो इसका मतलब है कि उसके शरीर में वायरल प्रवेश कर चुका है.

एंटीजन टेस्ट किट-

एंटीजन टेस्ट किट में वायरस के ऊपर मौजूद एक खास प्रोटीन का पता लगाया जाता है. इंसान के नाक और गले से लिए गए सैंपल की जांच में अगर टेस्ट किट में उस खास प्रोटीन का पता चलता है तो इसका मतलब है कि शरीर में कोरोना वायरस है.

आरटी पीसीआर टेस्ट-

आरटी पीसीआर टेस्ट में वायरस के डीएनए और आरएनए की जांच की जाती है. यह टेस्ट ज्यादा सटीक माना जाता है. हालांकि इसमें भी गलती के चांस हैं लेकिन यह टेस्ट काफी हद तक सटीक होता है. उक्त दो टेस्ट में गलत रिजल्ट आने के चांस भी रहते हैं. इस टेस्ट में समय ज्यादा लगता है और उक्त दोनों टेस्ट की रिपोर्ट आमतौर पर उसी दिन या अगले दिन तक मिल जाती है.

कब कराएं कोरोना टेस्ट

अगर आपके शरीर में बुखार, बदन दर्द, स्वाद और गंध न आने पर, सांस लेने में परेशानी के साथ ही सीने में  दर्द, आंखे लाल होना और लूज मोशन की समस्या हो सकती है.

कौन-कौन सी दवाएं हैं प्रभावी

कोरोना के इलाज में जो दवाएं प्रभावी मानी जा रही हैं, उनमें रेमडेसिविर प्रमुख है. जिन लोगों की हालत गंभीर है और उनके शरीर में ऑक्सीजन का स्तर कम हो रहा है, उन मरीजों में यह दवाई कारगर है. गौरतलब है कि संक्रमण होने के शुरुआती 9 दिनों में यह दवाई अहम है.

फेविपिराविर-

इस दवाई को संक्रमण होने के 72 घंटों में महत्वपूर्ण माना जाता है. आरटी  पीसीआर टेस्ट में पॉजिटिव आने पर मरीज को यह दवाई दी जाती है.

प्लाज्मा थेरेपी-

इमरजेंसी की सिचुएशन में प्लाज्मा थेरेपी की मंजूरी दी गई है. लेकिन यह तरीका सभी मरीजों में कारगर नहीं है.

 

 

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