Postpartum Depression: डिलीवरी के बाद मां को आ सकता है आत्महत्या का ख्याल! जानिए आखिर ये कैसी बीमारी

नई दिल्ली:

गर्भवती महिला की डिलीवरी के बाद घर में जब बच्चे की किलकारियां गूंजने लगती हैं तो हर किसी का ध्यान सिर्फ नवजात शिशु की ओर ही जाता है. बच्चे की मां किस तरह की समस्याओं से गुजर रही है, इस बारे में खुद वह महिला भी कई बार ध्यान नहीं देती. ऐसी ही एक गंभीर समस्या है पोस्टपार्टम डिप्रेशन (Postpartum Depression) जिसके बारे में अब धीरे-धीरे ही सही लेकिन भारत में भी बात की जाने लगी है. अमेरिका के नेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ हेल्थ (NIH) की मानें तो हर 4 में से 1 महिला डिलीवरी के बाद तनाव (Post Delivery Stress) का शिकार हो जाती हैं और इसे ही पोस्टपार्टम डिप्रेशन कहा जाता है.

पोस्टपार्टम डिप्रेशन के लक्षण

अलग-अलग महिलाओं में इसके लक्षण अलग-अलग हो सकते हैं लेकिन कुछ कॉमन संकेत और लक्षण (Signs and Symptoms) जो बीमारी से पीड़ित ज्यादातर महिलाओं में नजर आते हैं, वे हैं:

-हर वक्त उदासी महसूस होना (Feeling sad)

-चिड़चिड़ापन और ऐंग्जाइटी (Anxiety) फील करना

-हद से ज्यादा थकान महसूस करना और आलस आना

-बात-बात में मन में अपराधबोध आना (Feeling Guilty) खुद को किसी काम के लायक न समझना

-सिर में दर्द या पेट में दर्द की समस्या

-भूख न लगना, खाने की इच्छा न होना

-किसी भी तरह की एक्टिविटी में दिलचस्पी न दिखाना

-अपने बच्चे के साथ बॉन्डिंग बनाने में मुश्किल आना

-बार-बार रोने का मन करना और काफी देर तक बेवजह रोते रहना

-परिवार के सदस्यों या दोस्तों से खुद को अलग कर लेना, अकेले में रहना

अमेरिकी हेल्थ वेबसाइट medicalnewstoday.com की मानें तो पोस्टपार्टम डिप्रेशन का सामना कर रही कुछ महिलाओं में खुद को नुकसान पहुंचाने और आत्महत्या करने का ख्याल (Suicide) भी आता है. हालांकि ऐसा बहुत कम मामलों में होता है.

किन वजहों से होता है पोस्टपार्टम डिप्रेशन?

डॉक्टरों की मानें तो बच्चे के जन्म के बाद मां के व्यवहार में बदलाव आना या बहुत अधिक तनाव और डिप्रेशन महसूस होने के कई कारण हो सकते हैं:

– पहला कारण ये हो सकता है कि जिस तरह प्रेग्नेंसी के दौरान महिला के शरीर में काफी चेंज आता है, उसी तरह से बच्चे के जन्म के बाद भी महिला के शरीर में हार्मोन्स में काफी बदलाव (Hormonal Changes) आता है. इसमें एस्ट्रोजन, प्रोजेस्टेरॉन, टेस्टोस्टेरॉन जैसे हार्मोन्स शामिल हैं जिसका सीधा असर महिला के व्यवहार पर पड़ता है.

– इसके अलावा सामाजिक कारणों से भी महिला को तनाव हो सकता है. जैसे अगर बेटे की चाह हो और बेटी पैदा हो जाए तो इस वजह से भी तनाव हो सकता है.

– डिलीवरी के बाद घर की बाकी जिम्मेदारियों के साथ ही बच्चे की भी जिम्मेदारी आ जाती है (Child’s responsibility). ऐसे में महिला को इस बात की भी चिंता और तनाव हो सकता है कि वह बच्चे की जिम्मेदारी ठीक तरह से निभा पाएगी या नहीं.

– इसके अलावा बहुत सी महिलाएं शारीरिक रूप से कमजोर हो जाने या शरीर के प्रेग्नेंसी से पहले जैसा न रहने की वजह से भी तनाव महसूस करती हैं.

– नवजात शिशु की जरूरतों को पूरा करने की वजह से कई बार मां रातभर ढंग से सो नहीं पाती, नींद पूरी ना होने और थकान की वजह से भी पोस्टपार्टम डिप्रेशन हो सकता है.

– अगर बच्चे को संभालने के दौरान परिवार या दोस्तों से किसी तरह का सपोर्ट न मिले (No support from family or friends) और सबकुछ अकेले ही करना पड़े तो यह भी तनाव का एक कारण हो सकता है.

पोस्टपार्टम डिप्रेशन का इलाज

अगर समस्या बहुत ज्यादा गंभीर नहीं है और लक्षण सामान्य और शुरुआती ही हैं तो कई बार दवा की भी जरूरत नहीं होती. केवल काउंसलिंग और परिवार वालों के सहयोग से ही यह समस्या दूर हो सकती है. लेकिन अगर बीमारी बढ़ जाती है तो मनोचिकित्सक से जरूर संपर्क करना चाहिए. इस दौरान मरीज को मेडिकेशन थेरेपी दी जाती है, दवाइयां दी जाती हैं और साथ-साथ काउंसलिंग भी.

 

(नोट: किसी भी उपाय को करने से पहले हमेशा किसी विशेषज्ञ या चिकित्सक से परामर्श करें. Zee News इस जानकारी के लिए जिम्मेदारी का दावा नहीं करता है.)

 

 

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